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सिंधु घाटी की सभ्यता: हड़प्पा सभ्यता

आज हम अपने भारत के इतिहास के बारे में पढ़ेंगे

हड़प्पा सभ्यता


जैसा कि आप सभी को पता है भारत की सबसे पुरानी सभ्यता सिंधु घाटी सभ्यता है जिसे हड़प्पा सभ्यता भी कहा जाता है
इसका काल 2500 ईसा पूर्व से 1500 पूर्व है सिंधु घाटी सभ्यता का भारतीय इतिहास में एक विशिष्ट स्थान क्योंकि सभ्यता के आने से भारतीय इतिहास में मौर्य काल से पूर्व की विशिष्ट जानकारी प्राप्त होती है सिंधु घाटी सभ्यता विश्व की प्राचीनतम सभ्यता हूं जैसे मिश्र मेसोपोटामिया सुमेर एवं कीट के समान विकसित एवं प्राचीन थी यह ताम्र पाषाण संस्कृति भी है सर्वप्रथम 1921 में राय बहादुर दयाराम साहनी ने हड़प्पा नामक स्थान पर इस महत्वपूर्ण सभ्यता के अवशेषों का पता लगाया प्रारंभ में उत्खनन कार्य सिंधु नदी घाटी में ही किया गया तथा वही इस सभ्यता के अवशेष सर्वप्रथम प्राप्त हुए थे अतः इस सभ्यता को सिंधु घाटी सभ्यता कहा गया परंतु इस सभ्यता के अवशेष सिंधु नदी की घाटी से दूर गंगा यमुना के दोआब और नर्मदा ताप्ती के मुहाने तक प्राप्त हुए हैं अतः पुरातत्व वेदो ने पुरातत्व परंपरा के आधार पर इस सभ्यता का नाम उसके सर्वप्रथम ज्ञात स्थल के नाम पर रख दिया "हड़प्पा सभ्यता" |

हड़प्पा सभ्यता एक बहुत बड़ी सभ्यता थी इसका विकास दूरदराजओं तक था| यह सभ्यता पंजाब सिंध राजस्थान गुजरात तथा बलूचिस्तान के हिस्सों पश्चिमी उत्तर प्रदेश के सीमावर्ती भाग उत्तर में जम्मू से दक्षिण में नर्मदा नदी के मुहाने तक पश्चिम में बलूचिस्तान के मकरान समुद्र तट से लेकर उत्तर पूर्व में मेरठ तक सिंधु सभ्यता का संपूर्ण क्षेत्र लगभग 12,99,600 वर्ग किलोमीटर में था| 

इस सभ्यता के लोगों की एक अलग संस्कृति थी तथा लोगों के बीच सामाजिक और आर्थिक भिन्नताए भी थी| 

किस काल में मृतकों को दफनाया जाता था तथा कई स्थानों पर उस जगह इंटर्न दी जाती थी तथा मृतक के साथ अमृत यारों प्रांत प्रयोग करने के लिए आभूषण आदि भी रखे जाते थे| इन स्थानों की खुदाई में कई तरह के मनके प्राप्त हुए हैं जिन्हें देखकर इस काल के शिल्प कला का अनुमान लगाया जा सकता है| खुदाई में कुछ मिट्टी से बने खिलौने भी प्राप्त हुए हैं|

सिंधु घाटी में खुदाई के वक्त जो चित्र लिपि के लेख मिले हैं उनसे यह पता चलता है कि इस सभ्यता के बहुत से लोग शिक्षित थे| सिंधु घाटी के लोगों की इंजीनियरिंग विज्ञान की निपुणता का हमें उनके शहरों के योजनाबद्ध निर्माण उन के बने हुए मकानों स्नानघर सड़कों और पानी के निकास की प्रणाली से ज्ञात होता है| धातु और उनकी मिलावट तथा उनके व्यापारिक संबंध और उनकी अलग अलग तरह की चीजों को देखने से पता चलता है कि उन्हें भौतिकी विज्ञान का ठीक-ठाक ज्ञान था उनके सफाई पर बंद से यह लगता है कि यह लोग अपने स्वास्थ्य का विशेष ध्यान रखते थे इन सब बातों से यह साफ है की उनको गणित इंजीनियरिंग भौतिक विज्ञान रसायन विज्ञान नक्षत्र विज्ञान और ललित कला का बहुत ज्ञान था|

हड़प्पा वासी व्यापार भी किया करते थे| नदी के माध्यम से एक स्थान से दूसरे स्थान पर सामान लाते और ले जाते थे| यहां बनी बहुत सी वस्तुएं मिली हैं जिसे देख कर यह अनुमान लगाया जा सकता है कि यहां के लोग कहीं और से तांबा मंगवाते थे|संभवतः इन्हें तांबे की आपूर्ति ओमान द्वारा की जाती थी इस काल में मोहरों का प्रयोग भी किया जाता था लंबी दूरी के संपर्कों को सुविधाजनक बनाने के लिए मोहरों का प्रयोग आवश्यक होता था खुदाई में प्राप्त की गई मोहरों पर एक विशेष प्रकार की लिपि लिखी हुई है जिसे पढ़ना आज तक संभव नहीं हो सका इस काल के लोग बाट का प्रयोग भी किया करते थे, जो घनाकार होते थे तथा उन्हें चार्ट नामक पत्थर से बनाया जाता था|


हड़प्पा संस्कृति की विशेषताएं

आप यकीन नहीं करेंगे लेकिन इस संस्कृति से संबंधित 250 से भी अधिक स्थानों पर खुदाई हो चुकी है| परंतु केवल 6 स्थानों को ही नगर माना गया इनमें पहला था 

मोहनजोदड़ो इस सभ्यता का मुख्य केंद्र था मोहनजोदड़ो नगर जो सिंधु प्रांत के लरकाना जिले में स्थित है मोहनजोदड़ो का शाब्दिक अर्थ है मृतकों का टीला इस नगर का नाम इसलिए पड़ा क्योंकि इसकी 7 तहो से अनुमान लगाया जाता है कि यह नगर सात बार बना और सात बार उजड़ा|

इसका दूसरा मुख्य नगर था हड़प्पा यह पश्चिमी पंजाब के मिंट गुमरी वर्तमान नाम साहिबान जिले में लाहौर से लगभग 160 किलोमीटर की दूरी पर स्थित था यह नगर बहुत विशाल था यह मोहनजोदड़ो से भी बड़ा था इसकी खोज भी लगभग उसी समय श्री आरबी दयाराम ने की थी उनका विचार था कि यह नगर उत्तर प्रदेश अथवा भाग की राजधानी थी हड़प्पा में समानांतर चतुर्भुज के आकार की एक घड़ी छोटा किला बनी हुई थी इस नगर के चारों ओर एक दीवार बनी हुई थी जो शायद शत्रुओं से रक्षा के लिए बनाई गई थी|

Chanhudaro  यह नगर भी मोहनजोदड़ो और हड़प्पा की भांति पाकिस्तान में है| यह सिंध प्रांत में मोहनजोदड़ो से लगभग 130 किलोमीटर दक्षिण में है कालीबंगा यह स्थान भारत के राजस्थान में हैं| यहां पर हड़प्पा संस्कृति के दो अवशेषी धीरे चौड़ी सड़कें और वैज्ञानिक ढंग से बनाई गई नालियों एवं कच्ची ईंटों के चबूतरे हैं| 

इसका पांचवा नगर था बनावली  यह स्थान हरियाणा प्रांत के हिसार जिले में स्थित है इस के अवशेष बहुत कुछ कालीबंगा के अवशेष जैसे ही हैं यहां भी यहां डप्पा पूर्व और हड़प्पा कालीन संस्कृतियों के दर्शन होते हैं|

लोथल समुंदर के निकट स्थित है अतः यह अनुमान लगाया जाता है कि यह नगर समुद्री व्यापारी का एक बड़ा केंद्र रहा होगा लोथल में जो वस्तुएं प्राप्त हुई हैं उन से पता चलता है कि सिंधु घाटी की सभ्यता काफी दूर-दूर तक फैली हुई थी|

इन अवशेषों में प्राप्त कुछ अन्य स्थल भी हैं जैसे राखीगढ़ी [हरियाणा में], शाही टंप [बलूचिस्तान में] आदि स्थान|


नगर नियोजन

सिंधु घाटी सभ्यता की खोज से यह पता चलता है कि इस समय के लोग प्रयास नगरों में रहने वाले थे नगर में बड़ी-बड़ी सड़के थी जो एक दूसरे को समकोण पर काट दी थी यह सर के 4 मीटर से लेकर 10 मीटर तक चोरी की बाजारों के दोनों और लगभग 25 मीटर से 35 मीटर तक जोड़ी गलियां थी सड़के किस प्रकार बनी हुई थी कि चलने वाली बाजू एक सिरे से दूसरे सिरे तक गलियों अथवा सड़कों को स्वयं साफ कर दें|

सिंधु घाटी सभ्यता के लोगों ने अवस्थित एवं वैज्ञानिक ढंग से नालियों का प्रबंध किया था उन्होंने नालियां खड़िया मिट्टी छूने और एक प्रकार के सीमेंट से बनी हुई थी वे नालियों को खुला छोड़ ना हानिकारक समझते थे अतः वे उन्हें ईटों से पारते थे|
नगरों में हर प्रकार का प्रबंध लोगों की आवश्यकता व सुविधाओं को ध्यान में रखकर किया जाता था नगरों में अच्छे नालियों के अलावा गलियों में प्रकाश का उचित प्रबंध किया जाता था| बर्तन पकाने वाली भट्टी नगर से बाहर होती थी जिससे नगर में प्रदूषण में फैले यात्रियों के ठहरने के लिए सराय होती थी रात को नागरिकों की रक्षा के लिए पहले का उचित प्रबंध था|

खुदाई के दौरान पुरातत्वविदो को मोहनजोदड़ो में विशाल स्नानागार मिले| सिंधु घाटी का सबसे ज्यादा आकर्षक भवन शायद मोहनजोदड़ो का सबसे बड़ा स्नानागार है इस भवन के पीछे खुला चौकोर तालाब है जिसके चारों और छतों वाले गलियारे और छज्जे है यह स्नानागार पक्की ईंटों का बना हुआ है और नालियों के साथ जुड़ा हुआ है जो तालाब में पानी भरने और खाली करने के काम आती है स्नाना घर की सीढ़ियां ऊंचा मकान और चलते हुए पानी का प्रबंध देख कर ऐसा प्रतीत होता है कि यह तैरने के लिए बहुत बढ़िया तालाब है|


सिंधु घाटी सभ्यता के पतन के मुख्य कारण

1) सिंधु नदी में बाढ़ और तूफान आने के कारण इस सभ्यता का पतन हुआ इस नदी में बार-बार बाढ़ के आने से सिंधु घाटी में के बहुत से क्षेत्र नदी के नीचे आकर दब गए और उनके ऊपर कीचड़ की मोटी मोटी परतें जम गई|


2) यह भी संभव है कि सिंधु के क्षेत्र में जहां कभी बहुत बारिश होती थी 2000 ईसा पूर्व के समय यहां बारिश कम होने लगी और यह प्रदेश मरुस्थल बन गया इसके परिणाम स्वरुप लोग इस धरती को छोड़कर कहीं और चले गए होंगे|

3) यह भी हो सकता है कि सिंधु नदी ने अपना रास्ता बदल लिया होगा जिससे सभ्यता के बड़े-बड़े केंद्र डूब गए होंगे|

4) यह भी संभव है कि भयानक भूकंप आने के कारण सिंधु घाटी के क्षेत्र नष्ट हो गए होंगे और जमीन फटने से नगर गायब हो गए| हो|

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